बेंगलुरु के एक गांव में सुख समृद्धि और बारिश के लिए करवा दी लड़के की लड़के से शादी !

बेंगलुरु के एक गांव में सुख समृद्धि और बारिश के लिए करवा दी लड़के की लड़के से शादी !

हमारे देश में धर्म को लेकर इतना बड़ा अन्ध विशवाश की लोग इससे दूर कभी नहीं हो सकते हैं हमारे देश संस्कृति का हवाला देकर लोगो से कुछ भी करा सकते हैं हमार

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हमारे देश में धर्म को लेकर इतना बड़ा अन्ध विशवाश की लोग इससे दूर कभी नहीं हो सकते हैं हमारे देश संस्कृति का हवाला देकर लोगो से कुछ भी करा सकते हैं हमारे देश के लोगो मैं इतनी बुरी तरह धर्म के नाम का नशा हैं की कभ भी उसे दूर नहीं किया जा सकता हैं

हमारे भारत देश में इतनी ज्यादा जनसँख्या होने के कारण भी लोगो का धर्म के नाम पर विशवाश काम होने नाम नहीं ले रहा हैं। हमारे देश में भगवान को खुश करने के लिए नये नये तरकीब निकलते रहते हैं
हमारे देश के बाबाओ की जिंदगी बड़े ही ख़ुशी से कटती , और लोगो को मुर्ख बनाते रहते हैं लोग मुर्ख बनते रहते हैं

shaadi

आज हम आपको बता दे हमारे देश की LGBT कम्युनिटी अपने अधिकारों के लिए सालों से लड़ती आ रही है, पर संस्कृति का हवाला देकर उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया जाता रहा है लेकिन धर्म का हमारे देश में इतना बड़ा कद है कि जब किसी काम के आगे धर्म का टैग जुड़ जाता है, फिर वो काम गलत भी हो, तो भी सबको स्वीकार होता है.

आज मैं आपको बेंगलुरु के एक गांव में सुख समृद्धि और बारिश के लिए एक लड़के की लड़के से शादी करा दी गई ये सब भगवान को खुश करने के लिए किया गया हैं।

2017 की महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में गांववाले मंदिर की तरफ़ जा रहे थे और उनके आगे थे दो लड़के, जिनमें से एक ने दुल्हन की पोशाक पहन रखी थी. स्थानीय लोगों से पूछने पर पता चला कि ये यहां की एक परम्परा है जिसे ‘हराके’ कहा जाता है. इसके लिए दो लड़कों को चुना जाता है और फिर नियमबद्ध तरीके से उनकी शादी करवाई जाती है. फिर एक जुलूस निकाला जाती है. लोगों के अनुसार, ऐसा करने से क्षेत्र में समृद्धि आती है और खूब बारिश होती है. इस कार्य के लिए आस-पड़ोस के गांवों में जाकर चंदा इकट्ठा किया जाता है.

इससे पहले भी हम देश के कई हिस्से में बारिश के लिए गधों से लेकर मेढकों की शादी करवाते देख चुके है. ये परम्पराएं सबसे ज़्यादा बेंगलुरु और तुमकुरु के गांवों में मानी जाती हैं.

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