टीवी शोज़ Hit करने के ये हैं वो 8 फ़ॉर्मूले, जो उनकी TRP को पंहुचा देते हैं ‘Super से ऊपर’

प्लास्टिक सर्जरी से लेकर मक्खी तक, टीवी के डेली सोप में भयंकर बदलाव आये हैं. कितने एक्टर्स आये, कितने गए, लेकिन नहीं बदला तो सास-बहू का दबदबा. ये दबदबा इस हद तक बढ़ गया है कि कोई भी शो, भले ही कितनी भी मज़ेदार स्टोरी से शुरू हो जाए, उसकी नैय्या पार ये सास-बहुएं ही लगाती हैं.

इस पूरे मायाजाल में जिन दो लोगों पर सबसे ज़्यादा तरस आता है, वो है इन नाटकों के राइटर और साउंड डिज़ाइन वाले. एक-एक मिनट में बदलती स्टोरी और हर दिन आते ट्विस्ट में इन बेचारों का क्या हाल होता होगा, इस बात पर गौर करते हुए Caravan ने बात की TV इंडस्ट्री के कुछ ऐसे लेखकों से जो TRP की इस अंधी-दौड़ की मार झेलते हैं.

सुमेघा गुलाटी के लिखे इस लेख में धारावाहिकों को Hit बनाने के कुछ Rules का खुलासा किया इन्हें लिखने वालों ने:

 

1.नाटक की हीरोइन यानि बलिदान की देवी

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टेलीविज़न राइटर गीतंगशु डे कहते हैं, ‘सिमर हो या पार्वती या फिर तुलसी, उसे बलिदान देना होगा’. वो हर वक़्त अच्छाई की मूरत बनी रहेगी. कुछ भी हो जाए, उसका बलिदान वाला पार्ट कम नहीं होना चाहिए. वो गोली खा कर हॉस्पिटल पहुंचती है, वो साज़िशों का शिकार होती है, लेकिन वो किसी के साथ गलत नहीं करती. दुनिया इधर की उधर हो जाए, प्यारी बहू संस्कारी ही रहेगी.

2. जितनी अच्छी Heroine होगी, उतनी बुरी Vamp!

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जैसे मेन बहू सच्चाई की देवी होगी, Vamp सिर्फ़ साज़िश और उल्टे काम करने के लिए बनी होगी. उसका काम ही सबको फंसना होगा. तभी तो कोमोलिका को कभी अक्ल नहीं आई. उनका चरित्र उनके भड़कीले मेकअप और अतरंगी कपड़ों में भी दिखाने की कोशिश की जाती है. मतलब वैम्प से सुधरने की उम्मीद न ही रखिये.

3. वैम्प से लोगों का बोर होना

नेगेटिव किरदार से लोग बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं और उनको एक हद तक नापसंद भी करते हैं. इसीलिए सीरियल में नेगेटिव किरदार वाली औरत चेंज होती रहती है. मतलब कभी कोई, तो कभी कोई. वरना सीरियल चलेगा कैसे?
4. 70 परसेंट से ज़्यादा एपिसोड्स में सिर्फ़ महिलाएं दिखेंगी

तभी मैं ये सोचती थी कि इन घरों के पति और बेटे ऐसा क्या करते हैं, जो दिखते ही नहीं. घर की चिंता सिर्फ़ औरतों को ही क्यों होती है? अब जवाब मिल गया.

5. घर की बहू मतलब सीता

घर चाहे कितना ही बड़ा और अमीर क्यों न हो, घर की बहू अपनी महंगी शिफॉन की साड़ी पहने घर के रहस्य ही सुलझाएगी. न वो काम करेगी और न बाकी औरतें.

6. ऊटपटांग विश्वासों और अंधविश्वासों पर बनी कहानी हमेशा TRP बटोरती है

जब मक्खी, इच्छाधारी नागिन और आत्मा वाले धारावाहिक हिट होंगे, तो सीरियल बनाने वाली क्वीन तो कहानी की जगह ऐसी ही बेढंगी चीज़ें ही दिखाएगी.

7. जाति और धर्म की बात नहीं होती

वैसे तो उड़ान जैसे कई नाटक इसी सोच तले टिके रहे, लेकिन ज़्यादातर नाटकों में जाति और धर्म पर फालतू बहस नहीं होती. बस एक हंसती-खेलती पंजाबी फैमिली दिखती है, जिसमें बल्ले-बल्ले और शावा-शावा होता है.

8. जब सीन हो मज़ेदार

जिस सीन में TRP बढ़ने की थोड़ी बहुत भी गुंजाइश होती है, उसे तब तक खींचा जाता है, जब तक वो च्युइंग गम न बन जाए. ‘क्या-क्या-क्या’ पर जब कैमरा ज़ूम होता है या जब बेटे के नाजायज़ रिश्ते की खबर पूरे घर में पता चलती है, तो घर के हर मेंबर का Reaction दिखाया जाता है, ताकि वो Episode ज़्यादा देर तक चले. Monday से Sunday निकल जाता है, लेकिन सिमर की साड़ी वैसी की वैसी ही रहती है.

हमें लगता था हमारी नौकरी मुश्किल है, ये बेचारे तो प्रताड़ना झेल रहे हैं! सैल्यूट है आप महान लोगों को!

Source: Buzzfeed

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