बॉलीवुड एक्ट्रेसेज़ ने, फ़िल्मी दुनिया की चकाचौंध छोड़ चुनी नई ज़िन्दगी

हिंदी सिनेमा के विकास में कई मशहूर अदाकाराओं ने अपने अभिनय से योगदान किया है. उनके नाम आज भी लोगों के दिलों पर जादू चलाते हैं. अब भी जब रूपहले परदे पर नज़र आती हैं, तो पुरानी ही नहीं, नई पीढ़ी के लोग भी तारीफ करने से नहीं रुकते. आइए आज हम आपको कुछ ऐसी अभिनेत्रियों से मिलवाते हैं, जो किसी ज़माने में बेहद मशहूर थीं

वैजयंती माला
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हिंदी सिनेमा की शुरुआती फीमेल सुपरस्टार्स में से एक थीं वैजयंती माला. संगम (1964) और मधुमती (1958) आदि उनकी ब्लॉकबस्टर मूवीज़ थीं. उन्होंने देवदास (1955) में चंद्रमुखी के किरदार को अमर कर दिया. 60 के दशक के अंत तक उन्होंने फिल्मों से मना कर दिया और 1968 में शादी करके चेन्नई शिफ्ट हो गईं. वो पॉलिटिक्स में भी आईं, लेकिन सार्वजनिक रूप से कभी -कभार ही नज़र आईं.

मुमताज़
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राजेश खन्ना के साथ मुमताज़ की केमिस्ट्री बेजोड़ थी. उन्होंने एक साथ आठ फ़िल्में कीं और सारी बॉक्स ऑफिस पर हिट रहीं. 1974 में जब मुमताज़ अपने अभिनय और सफलता की बुलंदी पर थीं, उन्होंने करोड़पति मयूर माधवानी से शादी कर ली. इसके बाद उन्होंने इंडस्ट्री छोड़ दी. हालांकि 1990 में मुमताज़ ने ‘आंधियां’ से वापसी की कोशिश की थी, लेकिन फिल्म पिट गई. कैंसर पर जीत हासिल करने के बाद, वो अब एक खुशहाल ज़िन्दगी जी रही हैं.

रीना रॉय
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कालीचरण (1975) और विश्वनाथ (1978) के साथ ही रीना रॉय बॉलीवुड में अपनी धाक जमा चुकी थीं. इन दोनों ही फिल्मों में उनके हीरो शत्रुघन सिन्हा थे. 1976 में उनकी फिल्म ‘नागिन’ ने उनको फिल्म इंडस्ट्री का नगीना बना दिया. पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसिन खान से शादी करने के बाद 1983 में उन्होंने बॉलीवुड को छोड़ दिया. शादी न चलने के बाद वे वापस मुम्बई आईं, लेकिन उनकी फिल्मों को सफलता नहीं मिली.

राखी
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राखी ने शर्मीली (1971), दाग- ए पोयम ऑफ़ लव (1973), ब्लैकमेल (1973) और तपस्या (1976) से खुद को फिल्म इंडस्ट्री की लीडिंग एक्ट्रेस के रूप में स्थापित किया. वे अपने पति गुलज़ार से उस समय अलग हो गईं, जब उनकी बेटी मेघना केवल एक साल की थी. साल 2000 तक वे सहयोगी भूमिकाओं के माध्यम से फिल्मों में एक्टिव रहीं.

मीनाक्षी शेषाद्रि
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अस्सी के दशक से लेकर 90 के दशक के मध्य तक मीनाक्षी ने हीरो (1983),मेरी जंग (1985), शहंशाह (1988), घायल (1990) और दामिनी (1993) जैसी हिट फ़िल्में कीं. लेकिन फिर उन्होंने फिल्में करनी छोड़ दीं. बीते दो दशकों से वो यूएस में रहकर अपने बच्चों की परवरिश कर रही हैं.

माला सिन्हा
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हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री माला,, जो बेहतरीन फिल्मों प्यासा (1957), गुमराह (1963), हिमालय की गोद में (1965) आंखें (1968) में अपनी अदाकारी के लिए जानी जाती हैं. 80 के दशक से ही उन्होंने खुद को फिल्मों से थोड़ा दूर कर लिया था और 90 के दशक तक बिलकुल बंद कर दिया. माला ने नेपाली फिल्मों में अपने को-स्टार चिदम्बर प्रसाद लोहानी से शादी कर ली.

लीना चंदावरकर
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मुख्य रूप से अपने पति अभिनेता किशोर कुमार के नाम से जानी जाने वाली लीना, राजेश खन्ना के अपोज़िट फिल्म ‘महबूब की मेहंदी’ (1971) के लिए मशहूर हैं. लीना ने बैराग (1976) में दिलीप कुमार और शायरा बानो के साथ भी काम किया. उन्होंने 1980 के दौरान इंडस्ट्री छोड़ दी और शादीशुदा ज़िन्दगी संवारने की कोशिश में 1987 में किशोर कुमार की मृत्यु तक लगी रहीं. इसके बाद वे अधिकतर सार्वजनिक तौर पर नज़र नहीं आतीं.

राजश्री
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प्रसिद्ध फिल्ममेकर वी. शांताराम की बेटी राजश्री ने कई क्लासिक फिल्मों में काम किया, जिनमें गीत गाया पत्थरों ने (1964), जानवर (1965) और ब्रह्मचारी (1968) प्रमुख हैं. राजश्री ने अपने अमेरिकन प्रेमी ग्रेग चैपमैन से शादी करने के बाद 70 के दशक में फ़िल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया.

निम्मी
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सुपरहिट फिल्मों बरसात (1949), दीदार (1951),दाग (1952) और आन (1952).में निम्मी ने अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया था. लेकिन सिनेमा से रिटायर होने के बाद वो पब्लिक फंक्शन्स से दूर ही रहीं.

साधना
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अपने ज़माने में ख़ास हेयर कट के लिए मशहूर हीरोइन साधना युवाओं की स्टाइल आइकॉन हुआ करती थीं. उन्होंने हम दोनों (1962), मेरे महबूब (1963), वक़्त (1965) और मेरा साया (1966) जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया. उन्होंने राम कृष्ण नय्यर से 1966 में शादी की और इंडस्ट्री छोड़ दी. उस दौरान वे काफी मशहूर थीं. 25 दिसंबर, 2015 को कैंसर से मृत्यु होने से पहले वो फ़िल्मी दुनिया से दूर ही रहती थीं.

बबिता
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एक्ट्रेस बबिता ने दस लाख (1966), राज़ (1967), फ़र्ज़ (1967), औलाद (1968), हसीना मान जाएगी (1969), कब, क्यों और कहां (1970) जैसी 19 फिल्मों में काम किया. उन्होंने अपनी सबसे सुपरहिट फिल्म ‘कल आज और कल’ में होने वाले पति रणधीर कपूर के साथ काम किया. 1971 में रणधीर कपूर से शादी की और उसके बाद फिल्मों में ज़्यादा एक्टिव नहीं रहीं और फिर बिलकुल छोड़ दिया.

सुरैया
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सुरैया भारतीय सिनेमा की गायिका और अभिनेत्री थीं. वे जीवन भर अविवाहित रहीं और देवानंद के साथ अपने अधूरे प्रेम के लिए चर्चा में बनी रहीं. मिर्ज़ा गालिब ( 1954), सनम (1951) जैसी कई फिल्मों में उनके योगदान को कभी भुलाया न जा सकेगा. उन्होंने 40 और 50 के दशक में हिंदी फिल्मों में अभिनेत्री व गायिका के रूप में सक्रिय रहकर यादगार काम किया.

आशा पारेख
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आशा पारेख एक बॉलीवुड अभिनेत्री, निर्माता और निर्देशक हैं. वह 1959 से 1973 के मध्य सर्वश्रेष्ठ तारिकाओं में से एक थीं. उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री के साथ सम्मानित किया गया. आशा आजीवन अविवाहित रहीं. बिन फेरे हम तेरे (1979), मैं तुलसी तेरे आंगन की (1978), कन्यादान (1969) जैसी अनेक यादगार फ़िल्में कीं.

शर्मीला टैगोर
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शर्मिला टैगोर भारतीय फिल्मों की सशक्त अभिनेत्री रही हैं. उन्होंने अमर प्रेम (1971 ), आराधना (1969) जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया. लेकिन नवाब पटौदी से शादी के बाद उन्होंने फिल्मों को अलविदा कह दिया.

नीतू सिंह
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ऋषि कपूर की पत्नी नीतू सिंह को अपने ज़माने की बढ़िया अदाकारा माना जाता है. उन्होंने अपने करियर के दौरान दीवार (1975), अदालत (1976) जैसी दर्ज़नों हिट फ़िल्में दीं. शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से रिश्ता तोड़ लिया.

इन अदाकाराओं की पुरानी और हाल की फ़ोटोज़ देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है इनकी खूबसूरती का. ये न केवल सुन्दरता, बल्कि अपने अभिनय के कारण आज भी लोगों के दिलों से उतरी नहीं हैं. लेकिन फ़िल्में छोड़ने के बाद इनमें से ज़्यादातर हीरोइनों ने सादगी से जीने की राह चुनी.

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