बीता साल 2017 इन कलाकारों के नाम

बीता साल 2017 इन कलाकारों के नाम

2017 में जहां एक तरफ फिल्म इंडस्ट्री ने ‘शुभ मंगल सावधान'', न्यूटन’, ‘बरेली की बर्फी’ जैसी छोटी लेकिन अच्छी फ़िल्में दी, वहीं ज़्यादातर फिल्मो से लोगों

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2017 में जहां एक तरफ फिल्म इंडस्ट्री ने ‘शुभ मंगल सावधान”, न्यूटन’, ‘बरेली की बर्फी’ जैसी छोटी लेकिन अच्छी फ़िल्में दी, वहीं ज़्यादातर फिल्मो से लोगों को चीटिंग ही हासिल हुई. कई बड़े बैनर, कलाकार दर्शकों को लुभाने में नाकाम रहे. आइए ऐसी ही सात फिल्मों पर नज़र डालते हैं जो इस साल फिसड्डी साबित हुईं.

#1. ट्यूबलाइट

कास्ट: सलमान ख़ान, सोहेल ख़ान, ओम पुरी, मुहम्मद जीशान अय्यूब
कबीर ख़ान और सलमान ख़ान मिलकर ‘एक था टाइगर’ और ‘बजरंगी भाईजान’ का प्रदर्शन रिपीट न कर सके. अमेरिकन फिल्म ‘लिटल बॉय’ का देसी रूप दर्शकों को कुछ ख़ास नहीं भाया.. ‘ट्यूबलाइट’ सशक्त कहानी होने के बावजूद एक कमज़ोर फिल्म थी. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर नुकसान भी उठाया. इतना तगड़ा कि सलमान को डिस्ट्रीब्यूटर्स को पैसे लौटाने पड़े.

#2. बेग़म जान


स्टारकास्ट: विद्या बालन, इला अरुण, नसीरुद्दीन शाह, रजित कपूर
बेग़म जान 2015 में बनी शानदार बंगाली फिल्म ‘राजकाहिनी’ का रीमेक थी. ‘राजकाहिनी’ एक ज़बरदस्त फिल्म साबित हुई थी. हिंदी रीमेक को डायरेक्ट भी वही शख्स कर रहा था, जिसने ओरिजिनल बनाई थी. नेशनल अवॉर्ड जीत चुके डायरेक्टर सृजित मुखर्जी इस फिल्म से हिंदी सिनेमा में एंट्री कर रहे थे. सब कुछ लुभावना था. इन सब चीज़ों से मुतासिर होकर जो भी सिनेमा हॉल तक पहुंचा, उसके हाथ निराशा ही लगी. एक सशक्त कहानी, मंझे हुए डायरेक्टर और जानदार कलाकारों के बावजूद इसमें कुछ मिसिंग था. दर्शक इससे संतुष्ट न हो सके.

#3.भूमि


कास्ट: संजय दत्त, अदिति राव हैदरी, शरद केलकर

ये साल की सबसे बेकार फिल्मों में से एक है. ‘मैरी कॉम’ जैसी बेहतरीन फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर ओमंग कुमार ने इस बार ब्लंडर कर दिया. एक अजीब सी कहानी का उतना ही अजीब एग्जीक्यूशन था. संजय दत्त की कमबैक फिल्म होने का शोर भी फिल्म को बचा न सका. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी.

#4.सिमरन


कास्ट: कंगना रानौत, सोहम शाह
हंसल मेहता जिसने ‘शाहिद’, ‘सिटी लाइट्स’ और ‘अलीगढ़’ जैसी फ़िल्में बनाई. लेकिन ‘सिमरन’ देख कर लगता है 2017 अच्छे भले डायरेक्टर्स का डाउनफॉल ईयर रहा है. कमज़ोर कहानी वाली ये फिल्म सिर्फ एक चीज़ पर खेल रही थी कंगना रानौतI ‘क्वीन’ और ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ में बेतहाशा सराही जा चुकी कंगना इस फिल्म का इकलौता ट्रंप कार्ड थी. कंगना-हृतिक की लव कंट्रोवर्सी भी इसे दर्शक नहीं दिला पाईI

#5. सरकार – 3

कास्ट: अमिताभ बच्चन, जैकी श्रॉफ, मनोज बाजपेयी, यामी गौतम
2005 में आई ‘सरकार’ एक शानदार फिल्म थी. लोगों की भरपूर सराहना मिली. उसके बाद आई 2008 की ‘सरकार राज’ को दर्शकों ने उतना तो नहीं लेकिन फिर भी काफी हद तक पसंद किया. सीरीज़ की तीसरी इंस्टॉलमेंट को लोगों ने सिरे से नकार दिया. राम गोपाल वर्मा का ग्राफ और नीचे जाता रहा. सदी के महानायक कहलाने वाले अमिताभ बच्चन की उपस्थिति भी किसी काम न आई.

#6. बादशाहो

कास्ट: अजय देवगन, इमरान हाशमी, विद्युत जामवाल, ईशा गुप्ता
एक तो पीरियड ड्रामा, ऊपर से थ्रिलर. कागज़ पर शानदार लगने वाला कॉम्बिनेशन जब फिल्म बनकर परदे पर उतरा तो कुछ और ही था. न तो पीरियड ड्रामा वाला फील था, न ही थ्रिलर का रोमांच. मिलन लुथरिया और अजय देवगन का अतीत में हिट रहा कॉम्बिनेशन भी काम न आया. फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई. यहां तक कि भारतवर्ष में अचानक हिट हुई नुसरत साहब की कव्वाली ‘रश्क-ए-क़मर’ भी लोगों को सिनेमा हॉल तक खींच लाने में नाकाम रही.

#7. जब हैरी मेट सेजल

कास्ट: शाहरुख़ ख़ान, अनुष्का शर्मा
यह फिल्म इम्तियाज़ अली के शानदार करियर की सबसे कमज़ोर फिल्म. फिल्म आने से पहले शाहरुख़ के फैन बहुत उत्साहित थे. इम्तियाज़ का नाम देखकर सब आश्वस्त थे कि इम्तियाज़ का स्पेशल टच और शाहरुख़ का चार्म मिलकर एक बेहतरीन फिल्म बनेगी. लेकिन जब फिल्म रिलीज़ हुई तो सबके हाथ निराशा ही लगी. न तो इसमें इम्तियाज़ का मैजिकल टच था, न शाहरुख़ का जादू. कुछ और ही बवाल बन गया थाI उम्मीद ये थी कि इम्तियाज़ शाहरुख़ को लंबे समय बाद एक अच्छी फिल्म दे पाएंगे. हुआ ये कि शाहरुख़ ने इम्तियाज़ को उनके करियर की सबसे ख़राब फिल्म दे दी.

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