20 साल बाद जेल से गांव आया, गांव को देखकर बोला – मुझे वापस जेल भेज दो !

20 साल बाद जेल से गांव आया, गांव को देखकर बोला – मुझे वापस जेल भेज दो !

- अगर आपको उम्रकैद की सजा हुई हो, तो आप क्या चाहेंगे? - वो कौन सी चीज होगी जिसका आपको सबसे ज्यादा शिद्दत से इंतजार होगा? - रिहाई? - आजादी?

इस गांव में 27 साल से नहीं आया कोई मर्द फिर भी प्रेग्नेंट हो रही औरतें
डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
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– अगर आपको उम्रकैद की सजा हुई हो, तो आप क्या चाहेंगे?

– वो कौन सी चीज होगी जिसका आपको सबसे ज्यादा शिद्दत से इंतजार होगा?

– रिहाई?

– आजादी?

– जेल से बाहर निकलने का इंतजार?

– फिर जब रिहाई मिल जाए, तब क्या आप दोबारा जेल जाना चाहेंगे?

पुष्कर दत्त भट्ट अपनी बीवी और बेटी को मार डाला जिससे कई बरस पहले उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 20 साल काटने के बाद अगस्त (2017) में रिहा हुआ अब पुष्कर की उम्र 52 हो गई, इतने दिन के बाद अपने गांव से दूर रहा हैं पुष्कर का मन गांव जाने को किया, जब पुष्कर दत्त भट्ट अपने गांव गया तो कुछ और ही देखा…

गांव में देखा की पूरा गांव श्मशान बना हुआ है. न आदमी, न आदमी की जात. जो घर थे, वो खंडहर बन गए थे. ढह गए थे, खाली पड़े थे. जुलाई 2016 में गांव के पास एक बादल फटा था. एकाएक बाढ़ आ गई. बाढ़ कुल 21 लोगों की जान भी साथ ले गई. और इस बजह से गांववाले इतने डर गए कि उन्होंने गांव में रहने से इनकार कर दिया. और ऐसी बजह से गांव खाली कर दिया।..

छह महीने अकेले गांव में रहे पुष्कर दत्त भट्ट :-

पूरे गांव में अकेला आदमी. मगर इस तरह तो नहीं रहा जा सकता है. जेल से छूटकर गांव आया. खाली गांव में कैसे रहे? यहां न बिजली है, न पानी. अगल-बगल के जंगलों में रहने वाले जानवर दिन के वक्त भी गांव में नजर आते थे. ऐसे में अकेला इंसान कितने दिन हिम्मत करेगा? हारकर पुष्कर ने जिला प्रशासन को चिट्ठी भेजी. लिखा कि या तो प्रशासन उसके गांव को दोबारा बसाए. उसका पुनर्वास कराए. या फिर उसे वापस जेल आने दिया जाए. उसी जेल में जहां उसने जिंदगी के 20 साल गुजार दिए. उसने लिखा है कि मौजूदा हालात में तो वापस जेल लौटना बेहतर लग रहा है उसको…

पुष्कर दत्त भट्ट ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा :-

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉक्टर रंजीत कुमार सिन्हा से पता चला की जो इस गांव थे उनको सभी को जगह मिल गई और उनको पट्टा भी दिया जायेगा

ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने सर्वे कराया था. बाढ़ के खतरे को देखते हुए सरकार ने उनके पुनर्वास को मंजूरी दी… Source lallan

उन्हें नई जगह पर जमीन का पट्टा दिया गया. इस बात का भी ध्यान रखा गया कि नया गांव उनके खेतों से दूर न हो.

जिस समय ये सर्वे हुआ, तब पुष्कर दत्त भट्ट जेल में था. उसे मुआवजा नहीं मिल सका. अब उसकी चिट्ठी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने उसे मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है…

– उम्मीद की जानी चाहिए कि पुष्कर को भी नया घर मिल जाएगा. अपने पुराने गांववालों के साथ ही. ऐसा हुआ, तो उसे वापस जेल नहीं जाना होगा…

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