एक पत्थर चढ़ाने से होगी मुराद पूरी, न मिठाई, न फूल, और न सोना-चांदी !

एक पत्थर चढ़ाने से होगी मुराद पूरी, न मिठाई, न फूल, और न सोना-चांदी !

हम लोग अपने काम पूरा करने के लिए हर पूरी संभव कोशिश करते हैं फिर भी पूरा न हो तो मंदिर जा कर देवी देवताओं को काफी चढ़ावा चढ़ाते हैं जैसे की फूल, मिठाई,

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हम लोग अपने काम पूरा करने के लिए हर पूरी संभव कोशिश करते हैं फिर भी पूरा न हो तो मंदिर जा कर देवी देवताओं को काफी चढ़ावा चढ़ाते हैं जैसे की फूल, मिठाई, रुपया, चादर और सोना चांदी भी चढ़ाते हैं ताकि मेरा काम पूरा हो जाये। जब मन्नत पूरी होने के बाद ये सब अपने देवी देवतओं पर ये सब चढ़ाते हैं।

पर अगर आपसे कोई बोले आप की मन्नत पूरी होने पर आपको भगवान पर पत्थर चढ़ाना पड़ेगा तो आप इसका यकीन नहीं करेंगे, आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं जिस मंदिर में आपकी मन्नत पूरी होने पर बस आप एक छोटा सा पत्थर चढ़ाना पड़ता हैं

कर्नाटक के मांड्या के किरागांदुरू-बेविनाहल्ली रोड पर स्थित ‘कोटिकालिना काडू बसप्पा’ नामक इस अनोखे मंदिर में भक्त पत्थर का चढ़ावा चढ़ाते हैं… मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के मुताबिक, यहां आप भगवान को किसी भी साइज़ का पत्थर समर्पित कर सकते हैं, लेकिन हां प्रार्थना के लिए आपको सिर्फ़ 3 से 5 पत्थरों का ही चढ़ावा चढ़ाना होता है. यही कारण है कि मंदिर के बाहर विभिन्न आकार के ढेर सारे पत्थर जमा हो गए हैं….

ये मंदिर बैंगलुरु के मैसूर नेशनल हाईवे पर मांड्या शहर से महज़ 2 किलोमीटर की दूरी पर बना है. कोटिकालिना काडू बसप्पा की ख़ासियत ये है कि यहां पूजा करने के लिए कोई भी पुजारी नहीं है. और इसका कोई स्थायी ढांचा भी नहीं है. दर्शन के लिए आने वाले भक्त ही ख़ुद ही पूजा करते हैं. इस मंदिर में भगवान शिव की एक मूर्ति भी स्थापित है, जिन्हें स्थानीय लोगों भगवान काडू का दर्जा दिया हुआ है… जब भी किसी इंसान की मनोकामना पूरी होती है, तो वो लोग अपने खेत या फिर ज़मीन से पत्थर लाकर यहां चढ़ा देता है….source gazab

दर्शन के लिए आए एक भक्त ने बातचीत के दौरान बताया, की ज़्यादातर श्रद्धालु किसान होते हैं और वो अपने सुखद जीवन या फिर अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं. फसलों की कटाई या जो भी मनोकामना मानते हैं जब पूरी हो जाती हैं तो भक्त मंदिर में जाकर 3 या 5 पत्थरों का चढ़ावा चढ़ाते हैं और भगवान को प्रसन्न करते हैं

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