स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में ऐसा क्या कहा था जो की किताबों में शामिल हो सकता है

स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में ऐसा क्या कहा था जो की किताबों में शामिल हो सकता है

कोलकाता - पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार "08 मार्च" को अगले साल से नौवीं से बारहवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में विश्व धर्

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कोलकाता – पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार “08 मार्च” को अगले साल से नौवीं से बारहवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण को शामिल करने का फैसला किया. राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने यह जानकारी दी. रामकृष्ण मिशन के प्रतिनिधियों द्वारा एक बैठक में विवेकानंद के भाषण को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया. इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की और इस दौरान चटर्जी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे….

स्वामी विवेकानंद :-
कोलकाता में 12 जनवरी साल 1869 को जन्में नरेंद्र नाथ आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से दुनियाभर में जाने गए. उन्होंने न सिर्फ लोगों को जीवन को जीने की कला सिखाई. भारत के उत्थान के लिए उन्होंने बहुत काम किए. विवेकानंद की जब भी बात आती है, तो अमेरिका के शिकागो में दिए भाषण का जिक्र जरूर होता है. साल 1893 में उन्होंने उस समय जो कहा वह आज भी हर शख्स और हर समाज पर लागू होता है…

शिकागो भाषण में क्या था खास :-
शिकागो में भाषण के दौरान उन्होंने कहा था, ‘मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है. हम सिर्फ़ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं’. उन्होंने अमेरिका के शिकागो की धर्म संसद में कहा था, ‘ सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं और इनकी भयानक वंशज हठधर्मिता लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं. इन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है. कितनी ही बार यह धरती खून से लाल हुई है, कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं, अगर यह भयानक राक्षस न होते, तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता, लेकिन अब उनका समय पूरा हो चुका है’….source zee

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